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10th Geography Short Question Chapter 2 | 10th VVI Short Question

प्रश्न 1. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

उत्तर-पृथ्वी पर कोयला, पेट्रोल जैसे अनेक महत्वपूर्ण अनवीकरणीय संसाधन हैं जो एक बार उपयोग होने के बाद दोबारा उपयोग में नहीं आते हैं। विकास की गाड़ी को लगातार जारी रखने के लिए इन संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। नहीं तो इनकी प्राप्ति असंभव हो जाएगी। इसलिए संसाधनों का संरक्षण जरूरी है

प्रश्न 2. जलोढ़ मिट्टी के विस्तार वाले राज्यों के नाम बतावें। इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ? [2018A ]

उत्तर–जलोढ़ मिट्टी मुख्य रूप से बिहार, आन्ध्रप्रदेश, प. बंगाल, उत्तराखंड पंजाब, हरियाणा राज्यों में मिलता है। इस मिट्टी में मुख्य रूप चावल, जूट, तम्बाकू, गेहूँ, गन्ने, फसलें होती है।

प्रश्न 3. जलोढ़ मृदा से क्या समझते हैं? इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं ? [2017A]

उत्तरः—जलों द्वारा बहाकर लायी गई मिट्टी को जलोढ़ मृदा कहते हैं। जलोढ़ मृदा में निम्न फसलें उगाई जा सकती है-गन्ना, चावल, गेहूँ, मक्का,
दलहन आदि।

प्रश्न 4. फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस पर सहायक है ? (2012C)

उत्तर-फसल चक्रण द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है। गेहूँ, कपास, मक्का, आलू आदि को लगातार उगाने से मृदा में ह्रास उत्पन्न होता है। इसे तिलहन, दलहन पौधे की खेती के द्वारा पुनप्ति किया जा सकता है। इससे
नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है।

प्रश्न 5. खादर और बांगर मिट्टी में अंतर स्पष्ट करें?

उत्तर-नदियों के बाढ़ के मैदान की नवीन बारीक कणों वाली काँप मिट्टी को खादर एवं नदियों द्वारा जमा की गई पुरातन काँप मिट्टी को बांगर मिट्टी कहते हैं।

प्रश्न 6. भू-क्षरण के क्षेत्र लिखिए।

उन्तर—भारत के मध्य प्रदेश में चम्बल नदी की द्रोणी, उत्तर प्रदेश में आगरा, इटावा और जालौन जिलों में, तमिलनाडु के दक्षिण व उत्तरी अर्काट, कन्याकुमारी तिरुचिरापल्ली, चिंग्लीपुट, सलेम और कोयम्बटूर जिलों में भू-क्षरण क्षेत्र अधिक है।

प्रश्न 7. स्थानीय मिट्टी और बाहित मिट्टी से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर- स्थानीय मिट्टी में चीका व बालू की मात्रा लगभग समान होती है और कृषि के लिए उपयुक्त होती है जबकि बाहित मिट्टी में बालू, कूड़ा-करकट व जल की मात्रा अधिक होती है, इस पर कृषि करना सम्भव नहीं होता है।

 

प्रश्न 8. मृदा निर्माण के कारकों का उल्लेख करें।[2019C] 

उत्तर-मृदा निर्माण के कारक हैं-तापमान परिवर्तन, प्रवाहित जल की क्रिया, पवन, हिमनद और अपघटन की अन्य क्रियाएँ। ये सभी मिलकर मृदा निर्माण में सहयोग करती है। मृदा निर्माण में जैव एवं अजैव दोनों कारकों की भूमिका रहती है।

प्रश्न 9. पवन अपरदन वाले क्षेत्र में कृषि की कौन-सी पद्धति उपयोगी मानी जाती है?

उत्तर-पवन अपरदन वाले क्षेत्रों में पहिका कृषि (Shripharming) उपयोगी है जो फसलों के बीच घास की पट्टियाँ विकसित कर ली जाती है।

प्रश्न 10. समोच्च कृषि से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर–पहाड़ी या पर्वतीय भागों में समोच्च जुताई द्वारा कृषि होती है। ताकि इसके द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। तीव्र ढालों वाली भूमि पर समोच्च रेखाओं के अनुसार मेड़ बनाकर कृषि की जाती है ताकि पानी के बहाव में रूकावट आती है और कषि की जाती है।

प्रश्न 11. भारत के किन भागों में नदी डेल्टा का विकास हुआ है ? यहाँ की मृदा की क्या विशेषता है?

उत्तर भारत के पूर्वी तटीय मैदान स्थित महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा निर्मित डेल्टा का निर्माण हुआ है। यहाँ की मृदा में पोटाश, फास्फोरस और चूना जैसे तत्वों की प्रधानता है। अधिक उपजाऊ होने के कारण गहन कृषि की जाती है।

प्रश्न 12. राष्ट्रीय वन नीति कब बनाया गया?

उत्तर-राष्ट्रीय वन नीति 1952 ई. में बनाया गया ।

प्रश्न 13. भारत के कितने प्रतिशत भूमि पर मैदान का विस्तार है ?

उत्तर भारत के कुल उपलब्ध भूमि के लगभग 43 प्रतिशत भाग पर मैदान का विस्तार है।

प्रश्न 14. भू-क्षरण किसे कहते हैं ?

उत्तर-मृदा को अपने स्थान से विविध क्रियाओं द्वारा स्थानांतरित होना ही भू-क्षरण कहलाता है।

 

प्रश्न 15. पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन को कैसे रोका जा सकता है ?

उत्तर–पहाड़ी क्षेत्रों में समोच्च जुताई (Contour ploughing) द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है

प्रश्न 16. भारत में काली मिट्टी कहाँ पायी जाती है?

उत्तर—यह भारत में मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्र० तथा तमिलनाडु राज्य में मिलती है। यह भारत के 6.4 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर फैली
है। खास तौर पर दक्कन के लावा प्रदेश में मिलती है।

प्रश्न 17. लाल मिट्टी का वितरण क्षेत्र बताएँ।

उत्तर-लाल मिट्टी की भरमार तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, द०-पू०, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, छोटानागपुर एवं मेघालय पठार के क्षेत्रों में मिलती है। यह मिट्टी मुख्य रूप से 100.cm. से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मिलती है। भारत के कुल कृषि भूमि के 7.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि में मिलती है ।

प्रश्न 18. लेटेराइट मिट्टी की विशेषता क्या है?

उत्तर-लेटेराइट का शाब्दिक अर्थ ईंट होता है। इस प्रकार मिट्टी का विकास उच्च तापमान एवं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में हुआ है। अतः एल्युमीनियम और लोहे के ऑक्साइड के कारण इसका रंग लाल होता है। इस प्रकार की मिट्टी में रासायनिक खाद एवं अन्य के साथ प्रयोग का प्रयास किया जाता है। यह मिट्टी चाय, कहवा, काजू की खेती के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 19. “मिट्टी का कटाव एक गंभीर समस्या है।” कैसे?

उत्तर — बहते पानी या हवा जैसे प्राकृतिक वाहकों द्वारा मिट्टी का हटना या स्थानांतरित होना मिट्टी कटाव कहलाता है। तेज कटाव होने पर भूमि क्षतिग्रस्त हो जाती है तथा वह कृषि के लायक नहीं रह जाती है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड की लगभग 40 लाख हेक्टेयर भूमि कटाव से ग्रसित है।

प्रश्न 20. भूमि ह्रास को रोकने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दें।

उत्तर-भूमि-क्षेत्र में ह्रास के कई कारण हैं जिसे रोकने के लिए पाँच प्रमुख उपाय या सुझाव
हैं

(i) पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर खेती करना ।

(ii) मरुस्थल के सीमावर्ती क्षेत्र में झाड़ियों को लगाना ।

(iii) पशुचरण एवं वन कटाव पर प्रतिबंध लगाना ।

(iv) काटे गए वन के स्थान पर जंगल लगाना ।

(v) मैदानी क्षेत्रों में बेकार पड़ी भूमि पर वृक्षारोपण करना ।

प्रश्न 21. मृदा अपरदन की परिभाषा दें। मृदा अपरदन रोकने में सहायक तीन उपायों का उल्लेख करें।

उत्तर—प्राकृतिक अथवा मानवीय कारणों से मिट्टी का अपने मूल स्थान से हटना अथवा मिट्टी की उपजाऊ परत के कटाव एवं बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहा जाता है। मृदा अपरदन के लिए मृदा का असंगठित होना अनिवार्य है। इसके कई कारण हैं। मृदा. संरक्षण या मृदा अपरदन रोकने के तीन उपाय हैं

(i) वानिकी कार्यक्रम के तहत बेकार पड़ी भूमि पर सामाजिक वानिकी, क्षतिपूर्ति वानिकी एवं विशिष्ट वानिकी पर जोर देना।

(ii) पर्वतीय क्षेत्रों में वन-कटाव एवं स्थानांतरी कृषि पर प्रतिबंध लगाना एवं समोच्च रेखी कृषि करना।

(iii) मैदानी भागों में वृक्षारोपन के साथ-ही-साथ फसल-चक्र, पट्टी कृषि आदि पर जोर देना तथा सिंचाई द्वारा अधिक समय तक भूमि को हरा-भरा रखना।