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10th Geography Short Question Chapter 10

प्रश्न 1. बिहार में वन सम्पदा की वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए। [2019C, 20164)

उत्तर-बिहार विभाजन के बाद बिहार में वनों की स्थिति दयनीय हो गई है। वर्त्तमन में अधिकतर भूमि कृषि योग्य हैं। बिहार में 764.47 हेक्टेयर में ही वन क्षेत्र बच गया है, जो बिहार के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 6.87 प्रतिशत है। यहाँ प्रति व्यक्ति वन भूमि क औसत मात्र 0.05 हेक्टेयर है जे राष्ट्रीय औसत 0.53 हेक्टेयर से बहुत ही कम है। बिहार के 38 जिलों में से 17 जिलों से वन क्षेत्र समाप्त हो
गया है। पश्चिमी चम्पारण, मुंगेर, बांका, जमुई, नवादा, नालन्दा, गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों के वनों की स्थिति कुछ बेहतर हैं, जिसक कुल क्षेत्रफल 3700 वर्ग किलोमीटर है। शेष में अवक्रमित वन क्षेत्र हैं, जहाँ वन के नाम पर केवल झुरमुट बच गये हैं। सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर,
मोतिहारी, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, मधेपुरा, खगड़िया में एक प्रतिशत से भी कम भूमि में वन मिलते हैं।

प्रश्न 2. बिहार में नहरों के विकास से संबंधित समस्याओं को लिखिए।

उत्तर बिहार में जल संसाधन का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई, गृह एवं औद्योगिक संस्थानों में होता है। बिहार में सिंचाई के लिए नहर प्रमुख साधन हैं। यहाँ वर्तमान में 95 प्रतिशत से अधिक जल संसधन का उपयोग सिंचाई में होता है। इसके अलावा अनियमित एवं असमान वर्षा भी होती हैं। यहाँ कुछ फसलें शीत ऋतु में होती हैं और यह मौसम शुष्क रहता है। यहाँ मैदानी भागों में नहरों का विकास अधिक हुआ है, क्योंकि यहाँ पर समतल भूमि, मुलायम मिट्टी, विस्तृत कृषि क्षेत्र तथा सतत्वाहिनी नदियों द्वारा जल की आपूर्ति होती है। उत्तरी बिहार की अधिकतर नदियाँ हिमालय से निकलने के कारण सतत्वाहिनी हैं। यहाँ की नहरों में वर्ष भर पानी रहता है, इसके विपरीत दक्षिण गंगा के मैदान कर नहरें छोटानागपुर पठार से निकलने के
करण बरसाती हैं। इनमें वर्ष भर पानी नहीं रहता।

प्रश्न 3. बिहार में धान की फसल के लिए उपर्युक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।

उत्तर बिहार में धान की फसल खरीफ फसल के अंतर्गत आती है। यहाँ तीन उपजें भदई, अगहनी तथा गरमा होती है। यह राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में उत्पन्न की जाती है। बिहार की मैदानी भाग अधिक उपयुक्त है, क्योंकि जलोढ़ मिट्टी काफी
उपजाऊ है, यह फसल जून-जुलाई में लगाई जाती है। यह उष्णा जलवायु की फसल है। इसके लिए 20°-27° सेल्सियस तापमान 75-200 cm. वर्षा एवं अधिक श्रमिक चाहिए।

प्रश्न 4. कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इस कथन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 80% आबादी कृषि पर निर्भर है। झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार के लोगों के लिए कृषि का महत्व बढ़ रहा है। 2005-06 से 59.37% भूमि पर कृषि की जाती है । बिहार में
धान, गेहूँ, मकई, जौ, गन्ना, तम्बाकू, ज्वार, तेलहन, दलहन फसले होती है यहाँ सकल घरेलू उत्पादन में कृषि का योगदान सर्वाधिक है इसलिए कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

प्रश्न 5. बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर बिहार के दलहन फसलों में चना, समूर, खेसारी, मटर, रबी दलहन की फसलें हैं, जबकि अरहर और मूंग खरीफ दलहन की फसलें हैं। 2006-07 ई० में बिहार में रबी दलहन की खेती 519.6 हजार हेक्टेयर भूमि में की गई तथा खरीफ
दलहन की खेती 87.26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के किया गया। दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान बिहार में सबसे आगे है, जबकि औरंगाबाद और कैमूल जिले क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है।

प्रश्न 6. बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों ?

उत्तर बिहार के किशनगंज, शिवहर, दरभंगा, अररिया, मधुबनी जिले सिंचित क्षेत्रों की दृष्टि से काफी पीछे है । इस जिलों की सिंचाई की आवश्यकता सर्वाधिक है। किशनगंज के 21.81% फसल क्षेत्र ही सिंचित है। इसके कारण इस क्षेत्र में
कृषि में काफी पिछड़ा हुआ है। बिहार राज्य कृषि प्रधान राज्य है। ये राज्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहाँ स्थायी सिंचाई की आवश्यकता काफी अधिक है।

प्रश्न 7. बिहार में वन जीवों का संरक्षण महत्त्वपूर्ण है। क्यों?

वन और वन जीवों का संरक्षण महत्त्वपूर्ण है। यह राज्य एवं राष्ट्र का धरोहर होता है। जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं। यहाँ प्राचीन काल से ही वन एवं
वन जीवो की पूजा की जाती रही है। जैसे-वट, पीपल, आँवला और तुलसी। वन जीवों में चींटी से लेकर साँप जैसे विषैले जन्तु को भोजन दिया जाता है और पूजा की जाती है। पक्षियों को भी दाने देने का प्रचलन है। इसलिए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर
पर वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कई कार्यम चलाये जा रहे हैं।

प्रश्न 8. बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें [2013A ]

उत्तर-मौनसून की अनिश्चितता के कारण बिहार के किसी-न-किसी भाग में प्रतिवर्ष बाढ़ का आगमन होता है। बिहार की कोसी बाढ़ की विभीषिका के लिए बदनाम है। उत्तरी बिहार के मैदान बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं। उत्तरी बिहार में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सारण, गोपालगंज, वैशाली, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, सहरसा, खगड़िया, दरभंगा, मधुबनी इत्यादि हैं। इनक्षेत्रों में मुख्यतः घाघरा, गंडक, कमला, बागमती और कोसी नदियों से बाढ़ आती है। उत्तरी बिहार की नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के प्रमुख कारण हिमालय
तराई क्षेत्र में अधिक वर्षा है। एक सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में कुल बाढ़-क्षेत्र लगभग 64 लाख हेक्टेयर है।

प्रश्न 9. बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।

उत्तर-बिहार राज्य में वन क्षेत्र का प्रतिशत है.
पटना (0.01%), नालंदा (0.75%), जहानाबाद (0.10%), पूर्वी चम्पारण (0.02%), खगड़िया (0.01%), पूर्णिया (0.02%), किशनगंज (0.06%), अररिया (0.13%), कटिहार (0.29%)
वनों का विस्तार है

प्रश्न 10. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें।


उत्तर-आपार जल संसाधन के उपयोग के लिए बाढ़ की विभीषिका, सूखे की प्रचण्डता को देखते हुए बिहार में नदी घाटी योजनाओं का विकास किया गया है जिससे जल विद्युत, उत्पादन सिंचाई मछली पालन, पेय जल, औद्योगिक उपयोग
मनोरंजन एवं यातायात का विकास मुख्य उद्देश्य है।

प्रश्न 11. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की संख्या बताएँ और दो अभ्यारण्यों की चर्चा करें।

उत्तर- बिहार राज्य में 14 अभ्यारण्य एवं एक राष्ट्रीय उद्यान है। गौतम बुद्ध अभ्यारण्य (गया) में है। दरभंगा जिला में कुशेश्वर स्थान पर वन्य जीवों अभ्यारण थे वन्य जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। कुशेश्वर में पहले बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को फंसाया जाता था लेकिन जन जागरण के कारण अब यहाँ पर किसी भी प्रकार शिकार करना पूर्णतः वर्जित हो गया है।

प्रश्न 12. बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्यों की संख्या बताएँ और दो अभयारण्यों की चर्चा करें।

उत्तर-बिहार में एक राष्ट्रीय उद्यान एवं 14 अभयारण्य हैं जिसके अन्तर्गत 2064.41 हेक्टेयर भूमि हैकावर झील-बेगूसराय जिला के अन्तर्गत मंझौल अनुमण्डल में 2500 एकड़ पर फैला कावर झील वन जीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। कावर झील प्रवासी पक्षियों का प्रमुख पड़ाव है। प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक डा. सलीम अली ने इसे “पक्षियों का स्वर्ग” कहा था। कावर झील में 300 प्रजातियों के पक्षियों का अध्ययन एक साथ
संभव हैं।

प्रश्न 13. बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए ।

उत्तर-बिहार में वनों के अभाव के निम्नलिखित कारण हैं-

(i) बिहार विभाजन के बाद अधिकतर वनाच्छादित क्षेत्र झारखण्ड में चला गया है। वर्तमान बिहार में 6.87 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में ही वन है।

(ii) बिहार में गंगा का उत्तरी मैदान बहुत ही उपजाऊ है। अतः यहाँ के लोग वन लगाने की अपेक्षा कृषि कार्य करना ही सर्वोत्तम मानते हैं।

(ii) वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी यहाँ वनों का अभाव है।

(iv) सबसे महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि लोगों में वनों के महत्त्व से संबंधित जागरूकता नहीं है। इन कारणों से बिहार में वनों का तेती है ह्रास हो
रहा है।

प्रश्न 14. बिहार की मुख्य फसलें क्या हैं ?

उत्तर- बिहार की प्रमुख फसलों में धान, गेहूँ, मकई, गन्ना, तम्बाकू, महुआ, ज्वार, दलहन और तिलहन हैं।

प्रश्न 15. बिहार में जूट का उत्पादन किन-किन जिलों में होता है?

उत्तर- पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, किशनगंज, सहरसा, दरभंगा और समस्तीपुर जिलों में जूट का उत्पादन मुख्य रूप से होता है।

प्रश्न 16. दुर्गावती जलाशय परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

उत्तर — इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कैमूर एवं रोहतास जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण है।

प्रश्न 17. संक्षेप में शुष्क पतझड़ वन की चर्चा कीजिए।

उत्तर- बिहार के पूर्वी मध्यवर्ती भाग तथा द०-प० पहाड़ी भागों में इस प्रकार के वनों का विस्तार है । कैमूर और रोहतास जिले में इसका अधिक विस्तार है। यहाँ के प्रमुख वृक्ष खैर, बहेड़ा, पलास, महुआ, अमलतास, शीशम, नीम, हरे आदि है

प्रश्न 18. आर्द्र पतझड़ वन की चर्चा कीजिए?

उत्तर — इस प्रकार के वन दक्षिण पहाड़ी क्षेत्र एवं उत्तर पश्चिमी भाग में पाए जाते हैं । सुमेश्वर-दून (शिवालिक क्षेत्र) में 917 वर्ग में किलोमीटर क्षेत्र में इस वन का विस्तार है। इस प्रकार के वनों में मुख्य रूप से साल और शीशम के वृक्षों की प्रधानता है, इसके अतिरिक्त बाँस, सवाई घास, महुआ, जामुन, कटहल, कुसुम, केन्दु, गुल्लड़, अमलतास, गम्हार, काराज आदि के वृक्ष भी पाए जाते हैं

प्रश्न 19. बिहार में वनों का असमान वितरण है। कैसे?

उत्तर- बिहार में वनों का वितरण बहुत ही असमान है। मैदानी भागों एवं दियारा क्षेत्रों में तो प्राकृतिक वनों का पूर्णतः अभाव है। सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगुसराय, मधेपुरा, खगड़िया, नालन्दा में एक प्रतिशत से भी कम भूमि में वन मिलते
हैं। पश्चिमी चम्पारण, कैमूर, बाँका, जमुई, गया और मुंगेर जिलों के पहाड़ी भागों
में वनों का विस्तार है